Description
मेरी कुछ कविताएं काल्पनिक ना होकर पास पड़ोस, समाज में घट रही असहनीय घटनाओं, जो हथौड़े सी चोट करती हैं दिल- दिमाग में, फिर बेचैन हो मन में भावों के बवंडर उठाती हैं …बस उसी के प्रतिक्रियास्वरूप शब्दों का रुप धर जन्मती हैं कविता के रुप में, और तब मैं थोडी बोझमुक्त सी होती हूं।













